पौध रोपण करते समय ध्यान देने योग्य 15 बातें(15 Things to watch while transplanting seedlings)

पौधों(Seedlings) को उनके शुरुआती Nursery Pots से बड़े बर्तनों या कंटेनरों में रोपना उनकी विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सफलतापूर्वक पौध रोपण के लिए बुनियादी आवश्यकताएं यहां दी गई हैं:

कंटेनर/बर्तन का चयन:
ऐसे बर्तन या कंटेनर चुनें जो अंकुर के मौजूदा कंटेनर से बड़े हों। सुनिश्चित करें कि उनमें जलभराव को रोकने के लिए जल निकासी छेद हों।

पोटिंग मिक्स:
विशिष्ट प्रकार के पौधे के लिए उपयुक्त अच्छी जल निकासी वाले पॉटिंग मिश्रण का उपयोग करें। अंकुर की निरंतर वृद्धि को समर्थन देने के लिए मिश्रण पोषक तत्वों से भरपूर होना चाहिए।

मिट्टी को नम करना:
यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह समान रूप से नम है, रोपाई से पहले पॉटिंग मिश्रण को पानी दें। इससे संक्रमण के दौरान पौध पर तनाव कम करने में मदद मिलती है।

समय(Timing):
जब पौधों में मजबूत जड़ प्रणाली विकसित हो जाए तो उन्हें रोपित करें, लेकिन इससे पहले कि वे जड़ से बंध जाएं। यह आमतौर पर तब होता है जब उनके पास 2-4 असली पत्तियाँ होती हैं।

सौम्य हैंडलिंग(Gentle Handling):
जड़ों और पर्णसमूह को नुकसान से बचाने के लिए पौध को सावधानी से संभालें। अंकुरों को नाजुक तनों के बजाय उनकी पत्तियों से पकड़ें।

छेद की खुदाई(Digging Holes):
नए पॉटिंग मिश्रण में ऐसे छेद बनाएं जो अंकुरों की जड़ प्रणाली को बिना झुके या भीड़े समायोजित करने के लिए पर्याप्त बड़े हों।

अंकुर हटाना(Removing Seedlings):
अंकुरों को उनके वर्तमान कंटेनरों से धीरे से हटा दें। यदि जड़ें नीचे की ओर घूम रही हैं, तो बाहरी विकास को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें अलग कर दें।

पौधे लगाना(Placing Seedlings):
तैयार गड्ढों में अंकुर रखें, यह सुनिश्चित करते हुए कि मिट्टी का स्तर उनके पिछले कंटेनरों से मेल खाता हो। तने को दबने से बचाने के लिए उन्हें समान गहराई पर रोपें।

मजबूत मिट्टी(Firming Soil):
हवा के छिद्रों को खत्म करने के लिए प्रत्येक अंकुर के चारों ओर मिट्टी को मजबूत करें। इससे जड़ से मिट्टी तक अच्छा संपर्क स्थापित करने में मदद मिलती है।

पानी देना(Watering):
नए रोपे गए पौधों को अच्छी तरह से पानी दें। यह जड़ों के आसपास की मिट्टी को व्यवस्थित करने में मदद करता है और प्रत्यारोपण के झटके को कम करता है।

सूर्य के प्रकाश का एक्सपोजर(Sunlight Exposure):
धीरे-धीरे प्रत्यारोपित पौधों को उनके अंतिम सूर्य संपर्क से परिचित कराएं। यदि उन्हें बाहर ले जा रहे हैं, तो छायादार स्थान से शुरुआत करें और कुछ दिनों में धीरे-धीरे धूप का एक्सपोज़र बढ़ाएं।

निगरानी:
पहले कुछ दिनों तक रोपे गए पौधों की बारीकी से निगरानी करें। सुनिश्चित करें कि वे अच्छी तरह से अनुकूलन कर रहे हैं और लगातार देखभाल प्रदान करना जारी रखें।

निषेचन(Fertilisation):
रोपाई के बाद पतले, संतुलित उर्वरक का उपयोग करने पर विचार करें ताकि पौधों को पोषक तत्व प्रदान किए जा सकें क्योंकि वे अपने नए वातावरण के अनुकूल हो जाते हैं।

बाहरी कारकों से सुरक्षा(Protect from external Environment):
यदि बाहर रोपाई कर रहे हैं, तो पौधों को अच्छी तरह से स्थापित होने तक तेज हवाओं, अत्यधिक धूप या अत्यधिक तापमान से बचाएं।

लेबलिंग(Naming):
पौधों की पहचान करने और उनकी वृद्धि की प्रगति पर नज़र रखने के लिए नए कंटेनरों को लेबल करें।

इन बुनियादी चरणों का पालन करके और उचित देखभाल प्रदान करके, आप अपने अंकुरों के लिए उनके शुरुआती कंटेनरों से बड़े बर्तनों या कंटेनरों में एक सहज संक्रमण सुनिश्चित कर सकते हैं, जो स्वस्थ विकास और विकास के लिए मंच तैयार कर सकते हैं।

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