औषधिया गुण वाले इन पौधो को जरूर से जरूर लगायें अपनी बगिया में(Must have medicinal plants in your garden)

औषधीय पौधों का उपयोग सदियों से उनके चिकित्सीय गुणों के लिए किया जाता रहा है। इनमें विभिन्न यौगिक होते हैं जो स्वास्थ्य और कल्याण पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। यहां कुछ सामान्यतः ज्ञात औषधीय पौधों और उनके पारंपरिक उपयोगों की सूची दी गई है:

एलोवेरा (एलो बारबाडेन्सिस मिलर):
अपने सुखदायक गुणों के लिए जाना जाने वाला एलोवेरा का उपयोग जलने, घाव और त्वचा की जलन के इलाज के लिए किया जाता है।

पुदीना:
पुदीना का उपयोग पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने, सिरदर्द को कम करने और श्वसन समस्याओं को शांत करने के लिए किया जाता है।

हल्दी (करकुमा लोंगा):
एक शक्तिशाली सूजन रोधी, हल्दी का उपयोग गठिया जैसी स्थितियों के इलाज और समग्र प्रतिरक्षा स्वास्थ्य का समर्थन करने के लिए किया जाता है।

लैवेंडर (लैवंडुला अन्गुस्टिफोलिया):
लैवेंडर में शांत करने वाले गुण होते हैं और इसका उपयोग तनाव, चिंता को कम करने और बेहतर नींद को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है।

इचिनेसिया (इचिनेसिया पुरपुरिया):
अपने प्रतिरक्षा-बढ़ाने वाले गुणों के लिए जाना जाने वाला इचिनेशिया का उपयोग अक्सर सर्दी की गंभीरता को रोकने या कम करने के लिए किया जाता है।

अदरक (ज़िंगिबर ऑफिसिनेल):
अदरक का उपयोग मतली को कम करने, पाचन में सहायता करने और सूजन को कम करने के लिए किया जाता है।

बबूने का फूल (Chamomile):
कैमोमाइल में शांत प्रभाव होता है और इसका उपयोग अनिद्रा, चिंता और पाचन समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है।

लहसुन (एलियम सैटिवम):
लहसुन में रोगाणुरोधी गुण होते हैं और यह हृदय संबंधी लाभों के लिए जाना जाता है।

नीलगिरी (नीलगिरी ग्लोब्युलस):
नीलगिरी का उपयोग श्वसन संबंधी समस्याओं के लिए किया जाता है और यह खांसी की बूंदों और छाती की मालिश में एक आम घटक है।

जिनसेंग (Ginseng):
माना जाता है कि जिनसेंग ऊर्जा बढ़ाता है, तनाव कम करता है और प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देता है।

वेलेरियन (वेलेरियाना ऑफिसिनालिस):
वेलेरियन का उपयोग अनिद्रा और चिंता के लिए एक प्राकृतिक उपचार के रूप में किया जाता है।

दालचीनी (Cinnamomum verum):
माना जाता है कि दालचीनी में सूजन-रोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं।

सेंट जॉन वॉर्ट (Hypericum perforatum):
सेंट जॉन वॉर्ट का उपयोग हल्के से मध्यम अवसाद के लिए एक प्राकृतिक उपचार के रूप में किया जाता है।

रोज़मेरी (Rosemary):
रोज़मेरी में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं और ऐसा माना जाता है कि यह याददाश्त और एकाग्रता को बढ़ाता है।

बिछुआ (Nettle):
बिछुआ का उपयोग इसके सूजनरोधी गुणों और एलर्जी से राहत के लिए किया जाता है।

फीवरफ्यू (Feverfew):
फीवरफ्यू का उपयोग पारंपरिक रूप से माइग्रेन को रोकने और इलाज के लिए किया जाता है।

ऋषि (Sage):
माना जाता है कि सेज में रोगाणुरोधी गुण होते हैं और इसका उपयोग गले की खराश और मुंह की सूजन के लिए किया जाता है।

मुलेठी (Licorice):
मुलेठी का उपयोग इसके सूजनरोधी गुणों और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं को शांत करने के लिए किया जाता है।

पवित्र तुलसी (Holy Basil):
होली बेसिल या तुलसी को एडाप्टोजेन माना जाता है और इसका उपयोग तनाव से निपटने के लिए किया जाता है।

जिन्कगो बिलोबा (Ginkgo biloba):
माना जाता है कि जिन्कगो बिलोबा संज्ञानात्मक कार्य और परिसंचरण में सुधार करता है।

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